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आज मेरा नव वर्ष नहीं है.. नवीन सिंह परमार (प्रबंध संपादक” श्रीनारद मीडिया)

आज मेरा नव वर्ष नहीं है.. नवीन सिंह परमार (प्रबंध संपादक” श्रीनारद मीडिया, प्रधान सम्पादक “चम्पारण न्यूज”)

मित्रो, नमस्कार

आज मेरा नव वर्ष नहीं है, इसलिए मैं, आज आपको नव वर्ष का बधाई नहीं दूंगा और न ही आपके द्वारा प्रेम से दिया गया बधाई ही स्वीकार कर पाऊंगा।

 मित्रो, नववर्ष हर धर्म का अलग होता है। ज्यादातर देश ईसाई धर्म के,  मुस्लिम,बोद्ध, बहाई, हिन्दू धर्म, और अंत में पारसी को मानने वाले। ज्यादातर सभी देश में नव वर्ष का आगमन उनके धर्म के अनुसार ही मनाया  जाता है।

2017 अंग्रेजी का नववर्ष हे और प्रायः सभी देशों में मनाया जाता है इसका एक सामान्य कारण शायद पुरे विश्व को एकसार बनाना ही था ताकि सभी देशों में  समय, वार, दिनाँक, महीना, हर देश में एक ही हो जिससे कोई भ्रम ना हो, अच्छी बात है सब ने इसे राजकीय कार्यो के लिये अपनाया। पर किसी भी देश ने अपने धर्म के नववर्ष को अनदेखा नहीं किया।

आज से शुरू हो रहा  नया वर्ष 2017अंग्रेजी है, अर्थात ईसाई धर्म का नया साल। मुस्लिम का नया साल होता है और वो हिजरी कहलाता है इस समय 1434 हिजरी चल रही है।

हमारे हिन्दू धर्म का इस समय विक्रम संवत 2073 चल रहा है।इससे सिद्ध हो गया कि हिन्दू धर्म ही सबसे पुराना धर्म है बाकी धर्म हिन्दुयों ने ही बाद में अपनाये हे।

Before Christ, (BC) यानी ईसा से पहले, After Christ (AC) यानी ईसा के बाद। मतलब ईसा के बाद ईसाई धर्म और नया वर्ष आया परंतु BC जो अंग्रेजो ने ही दिया था। तो ईसा से पहले BC क्या था? जी हाँ उससे पहले विक्रम संवत था जो सम्राट विक्रमादित्य ने चलाया था भारत को एक सूत्र में लाने के लिए।

इस विक्रम संवत से 5000 साल पहले इस धरती पर भगवान विष्णु श्रीकृष्ण के रूप में अवतरित हुए, उनसे पहले भगवान राम, और अन्य अवतार हुए यानी कहा हमारा हजारो वर्ष पुराना हमारा सनातन धर्म और हम मना रहे हे गढ़े मुर्दों का नया वर्ष ? जरा सोचिए….

सीधे सीधे शब्दों में हिन्दू धर्म ही सब धर्मों की जननी है , गुरुनानक जी, महावीर, गौतमबुद्ध, सब के पिता हिन्दू ही थे।

मैं किसी धर्म का विरोध नहीं कर रहा सबका सम्मान करता हूँ पर सभी हिन्दू, मुस्लिम को बतलाना चाहता हु की इस इंग्लिश कलेण्डर के बदलने से हमारा वर्ष नहीं बदलता? हमारा कर्म अपने ही  कलेण्डर से ही चलेगा क्योकि जब आप पैदा हुए पंडित जी से पूछा बच्चा मूल में तो पैदा नहीं हुआ ? पंडित जी ने पत्रा देखा और बताया वो हिन्दू कैलेंडर था।

मूल शांति हिन्दू पंचांग से हुई, नामकरण हिन्दू् पंचांग  से हुआ,मंगल दोष हिन्दू पंचांग से निकला, विवाह मिलान हिन्दू पंचांग से हुआ, विवाह हिन्दू पंचांग से हुआ,सारे व्रत त्यौहार हिन्दू पंचांग  से मरने की तेहरवीं भी हिन्दू पंचांग से आयी ,मत्यु के समय पंडित जी से पंचक पूछा तो वो भी हिन्दू पंचांग  से ,मकान का उदघाटन, जन्मपत्री,विवाह योग्य, स्वास्थ्य रोग, और अन्य सभी समस्याएं का निराकरण हिन्दू कलेण्डर से ही होता है।

आप जानते है कि जन्माष्टमी, होली, दीपावली, राखी, भाई दूज, करवा चौथ, एकादशी, शिवरात्री, नवरात्रि, दुर्गापूजा, सभी विक्रमसंवत कलेण्डर से ही निर्धारित होते है इंग्लिश कलेण्डर में इनका कोई स्थान नहीं होता हेै।फिर आपके इस सनातन धर्म के जीवन में इंग्लिश  नववर्ष या  कलेण्डर है कहाँ ? आप अपने क्रिस्चियन ओर मुस्लिम मित्रो को नव वर्ष की शुभकामनाये अवश्य दे पर अपने सनातन धर्म के नव वर्ष को अवश्य मनाये । ह‌िन्दू पंचांग के अनुसार नया वर्ष चैत्र शुक्ल प्रत‌िपदा से शुरु होता है। इस वर्ष यह त‌िथ‌ि 29 मार्च 2017 को है। मै, आज अर्थात 01 जनवरी ईस्वी सन् 2017 को अपना नया वर्ष नहीं मनाने जा रहा हूँ, आगे आप की  मर्जी…..

आपका अपना नवीन सिंह परमार प्रबंध संपादक”श्रीनारद मीडिया, और प्रधान सम्पादक “चम्पारण न्यूज”

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मोदीजी अब तो लकीर खिंच चुकी है, तीर निकल चुका है आगे बढ़िए, जनता आपके पीछे खड़ी है…

दीपक शर्मा जी की कलम से …..✍

भूल जाईये बीजेपी का कोष. भूल जाइये संघ का कोष. भूल जाइये चुनाव का कोष. अब कतार में खड़ा देश करेगा मदद।

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री मोदी ने 8 नवम्बर की रात जो गहरी लकीर खींची है, उस लकीर के एक तरफ अब तीन फीसद लोग हैं और दूसरी तरफ सारा देश. 

मुझे विश्वास है कि इस लकीर को मोदी ने अचानक नही खींचा है. उन्होंने कई रातें, कई दिन, ये विचार ज़रूर किया होगा कि लकीर खींचने के बाद वो खुद कहाँ खड़े होंगे ? 3 फ़ीसद के साथ या फिर 97 फ़ीसद के साथ ?

मोदीजी अब तो लकीर खिंच चुकी है…तीर निकल चुका है… चक्र चल गया है 

अब वो बिल्डर, वो आढ़ती, वो अंगड़िया, वो हवाला बाज़, वो डीलर, वो पावर ब्रोकर ..अब वो आपके साथ नही है. अब वो आपके सामने है. ये वही नंबर 2 वाला तबका है जो चुनाव में गड्डियां बरसाता है. जो सूद की, ब्याज की, रिश्वत की, दलाली की…जीबी रोड की, मटका की, स्मैक की , सर्राफा की….हर काली रकम नेता पर निछावर करता है.


ये तबका ही राजनीति का, सत्ता का, सरकार का गेम चेंजर है. और इसके पीछे 0 .10 फीसद वो क्रीमी लेयर, खरबपति वाला तबका खड़ा है जिसे देश में लोग टाटा बिड़ला कहते हैं. मोदीजी नाराज़ तो ये किंग मेकर तबका भी आप से है. ये वही बाहुबली कारपोरेट है जो कुल राजस्व का चालीस परसेंट सरकार को देता हैं. जो एक हाथ से सरकार को लूटता हैं और दूसरे हाथ से सरकार को कुछ देता है. ये बाहुबली भी भीतर ही भीतर आप से बेहद नाराज़ है.

मोदीजी शायद अब आप लकीर के इस तरफ हैं. जिस तरफ वोटबैंक है. जो बीस दिन से सर्पाकार कतार में खड़ा है. जिसने अभी इसलिए उफ़ नहीं किया क्योंकि आपने असली चोट उस सेठ को दी जो इन्ही कतारों में खड़े लोगों का दोह रहा था. लेकिन लकीर के उस तरफ वो तीन परसेंट है जिसके पास इस वोट का बैंक है. मोदी जी गणित विचित्र है. आपको 97 परसेंट वाले का वोट भी चाहिए और आपकी पार्टी को 3 परसेंट वाले का पैसा भी. 


गणित वाकई विचित्र है. लेकिन सच ये है कि देश का बहुमत अब मूड बना चुका है. वो अब कतई नहीं चाहता कि 70 साल का ये सबसे बड़ा फैसला फुस्स हो जाय. ये फैसला फुस्स हुआ तो आप भी फुस्स हो जायेंगे. ये फ़ैसला हारेगा तो आप चुनाव भी हारेंगे. 

2017 के सभी विधान सभा चुनाव से लेकर 2019 के महासंग्राम तक. आप हर चुनाव हारेंगे अगर ये फ़ैसला फुस्स हुआ. मोदीजी आपकी हार का मुझे इतना ग़म नहीं है. 

लेकिन आपकी हार के बाद फिर कम से कम अगले पचास बरस तक इस देश का कोई प्रधानमंत्री काली कमाई वालों पर कलम चलाने का फिर साहस नहीं जुटा पायेगा. आप से ज़्यादा अब हम हारेंगे. ये लड़ाई हारे तो बरसों बरस टूट जायेंगे हम. फिर वो दो कमरे का फ्लैट, वो चार पहिये की गाड़ी, वो गाढ़ी कमाई के पैसों का फल, वो ज़िन्दगी की छोटी छोटी हसरतें. सब गँवा बैठेंगे हम.

मोदीजी, आपकी तैयारियों में अब भले ही कमियां रह गयी हों. भले ही सबको प्रसव पीड़ा से गुज़रना पड़ रहा है. भले ही दिहाड़ी का मज़दूर भटक रहा है. पर देश के इस दंश की अब सर्जरी कर दीजिये. 

अब गांडीव मत रखियेगा. अब तीर हवा में है. उसे सही दिशा दीजिये. अब भूल जाईये बीजेपी का कोष. भूल जाइये संघ का कोष. भूल जाइये चुनाव का कोष. अब बोल दीजिये अपनी कैबिनेट से की सब मनोहर पर्रिकर, सुरेश प्रभु बन जाएं. अब बोल दीजिये धर्मेंद्र प्रधान और पियूष गोयल से कि तुम्हारी ज़रुरत नही. अब कतार में खड़ा देश मेरी मदद करेगा. 

अगर हम सिर्फ किसी के वादों पर दस दस रूपए देकर रामलीला मैदान से एक पार्टी को जन्म दे सकते हैं. तो अगर आपने सबसे बड़ी कुर्सी पर रहकर कुछ कर के दिखा दिया तो ये देश आपके आगे बिछ जायेगा. अब मत लीजिये पियूष गोयल से चुनाव में हेलीकाप्टर का पैसा. अब धर्मेंद्र प्रधान और अमित शाह वाह को छोड़िये.


चुनाव के ख़र्चों के नाम पर ये लोग आपकी साख डुबो देंगे. आपने लकीर बड़ी खींच दी है. इसलिए जो उधर रह गए उन्हें छोड़ दीजिये. मोदीजी अब आप वो सात लाख करोड़ के नोट ज़ब्त कराइये जो बीस दिन बाद भी बैंक में नहीं पहुंचे है. 

अब आप उस रियल एस्टेट को खंगाल दीजिये जहाँ इससे भी दस गुना ज्यादा काला माल दबा है. अब सर्राफा और अंगाड़ियों की थैली में हाथ डाल दीजिये. मोदीजी आपकी कैबिनेट के कुछ कमज़र्फ़ अगर पीछें हटें. तो आप अकेले बढ़िए, मोदीजी आगे बढ़िए अरे एक नज़र पीछे तो देखिये, जनता आपके पीछे खड़ी है.

न्यूज स्रोत से पढें

प्रधान संपादक की कलम से- ✍सुशासन बाबू बिहार का  वर्तमान रो रहा है, लेकिन इतिहास आपको मांफ नहीं करेगा

 

🍄सुशासन बाबू बिहार का  वर्तमान रो रहा है, लेकिन इतिहास आपको मांफ नहीं करेगा- 

  ✍ प्रधान संपादक नवीन सिंह परमार की कलम से☞अभी हम सीवान के पत्रकार साथी व दैनिक हिन्दुस्तान समाचार-पत्र के ब्यूरो प्रभारी राजदेव रंजन जी निर्मम हत्या से उबर ही नहीं  पाए थें कि आज सुशासन बाबू के राज एक और पत्रकार साथी व दैनिक भास्कर सासाराम के ब्यूरो प्रभारी धर्मेन्द्र सिंह की हत्या अपराधियों ने कर दी।

बिहार में पत्रकारों की हत्या का दौर थमने की जगह बढ़ता जा रहा। सरकार के संरक्षण में अपराधी पत्रकारों की हत्या कर कलम की आवाज़ को दबाने का मुहीम चलाए हुए है।

शनिवार की सुबह  अपराधियों का कहर सासाराम में दैनिक भास्कर हिंदी दैनिक के पत्रकार (ब्यूरो चीफ) धर्मेन्द्र सिंह के ऊपर गिरा। उनको गोली मार दी गयी। जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गये। इलाज के लिए वाराणसी ले जाने के दौरान उनकी मौत हो गयी।

घटना मुफस्सिल थाना के अमरा तालाब की है जहाँ आज सुबह अपने घर के पास ही चाय की दुकान में चाय पी रहे धर्मेंद्र सिंह को एक बाईक पर सवार तीन अपराधियो ने सीने में गोली दाग दी। बिहार में अपराधियों के बढे मनोबल का यह एक और उदाहरण है।

हे ईश्वर, मृतक आत्मा को शांति और उनके परिवार को इस महाविपदा की घड़ी का सामना करने का सामर्थ्य दें।

श्रीनारद मीडिया व चम्पारण न्यूज परिवार सासाराम के दिवंगत पत्रकार को श्रद्धांजलि देते हुये सुशासन बाबू से कहना चाहता है कि- अब तो बस करो,एक वर्ष के अंदर चार कलम के सिपाही आपके राज में शहीद हो गए । सुशासन बाबू कुछ कीजिए, नहीं तो बिहार का वर्तमान तो रो रहा है, लेकिन इतिहास आपको मांफ नहीं करेगा ।

☞श्रीनारद मीडिया द्वारा प्रसारित

🌐हमें जगा कर सदा के लिए सो गए कश्मीर में शहीद  रक्सौल के सपूत जितेंद्र कुमार सिंह 

CN: अतिथि सम्पादक मनीष सिंह जी की कलम से

🌐हमें जगा कर सदा के लिए सो गए कश्मीर में शहीद  रक्सौल के सपूत जितेंद्र कुमार सिंह 

📝✒ मनीष सिंह की कलम से ☞रक्सौल इस धरती पर कौन जीने आया है,मरना तो हम सभी को  है पर जीवन में कुछ ऐसे भी लम्हे आते हैं जो मन मस्तिष्क पर अमिट छाप छोड़ कर चले जाते हैं और लाख कोशिश के बाद भी हम नही बिसर पाते।

रक्सौल की धरती पर पहली बार माँ कहने वाले सच्चे सपूत जितेंद्र कुमार सिंह ने भारत माता व तिरंगे की शान के लिए अपनी शहादत दे दी।आज चम्पारण के अलावा देश दुनियां में वीर सपूत का नाम ऐसे लिया गया।जैसे कि हमारे बीच का एक भाई हमारी रक्षा के लिए अपनी बलि दे दी हो।

शहीद जितेंद्र आज देश के लिए वीर गति को प्राप्त हो गए पर हम रक्सौलवासियों के लिए एक संदेश छोड़ गए क़ि देश, अनुशासन, मजहब व कर्तव्य से बड़ा कुछ भी नही होता।जरूरत पड़े तो शहादत देने से पीछे नही हटना चाहिए।

हॉलांकि परिजनों को जो अपूरणीय क्षति पहुची है उसे धन या पैसे से कभी भी पूरा नही किया जा सकता।यह पुरानी बात है क़ि भारत और पाकिस्तान की सीमा पर कई वीर शहीदों ने अपने खून से वहां की भूमि को लाल कर दिया।पर नई बात यह है क़ि इस धर्मयुद्द में हमारे रक्सौल के नायक ने बखूबी अपने कर्तव्य का निर्वहन किया है।हमारा सीना इस लिये चौड़ा हो रहा है क़ि हमारा नायक रक्सौल का है।पर दुखद बात है क़ि उसे हमें नम आँखों से विदाई भी देनी पड़ी।कभी कभी यह लगता है क़ि जितेंद्र कुछ ही महीने में रिटायर हो जाते और हमारे बीच आम जनों की तरह जीवन जीते।

बहरहाल, देश के लिए लड़ते लड़ते दम तोड़ना सबों के वश की बात नही है।इसलिए तो कहा गया है क़ि देश के लिए वीर गति को प्राप्त करना सचमुच सौभाग्यपूर्ण है।रक्सौल की जनता ने मुख्य सड़क पर जिस जज्बे से अपने लाल का इंतजार किया,शायद ऐसा नजारा जीवन में हमे दुबारा देखने को नही मिले।

सम्पादकीय:ओ दाना मांझी, सुना है तुम पत्नी की लाश को कन्धे पर लेकर दस किलोमीटर तक पैदल चले।

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🌎मेरा देश बदल रहा है …. 🌎मेरा सोच बदल रहा है, ओ दाना मांझी, सुना है तुम पत्नी की लाश को कन्धे पर लेकर दस किलोमीटर तक पैदल चले।

👉 चम्पारण-न्यूज  “अतिथि सम्पादक” विष्णु कुमार की कलम से….✒ओ दाना मांझी, सुना है तुम पत्नी की लाश को कन्धे पर लेकर दस किलोमीटर तक पैदल चले…

और सब तो उपरवाला जाने, लेकिन ये तो बता कि तुम्हे इस दस किलोमीटर मे कोई भी फेसबुकिया महान आत्मा नही मिला था क्या? क्या कोई भक्त, अन्धभक्त, विरोधी या अन्धविरोधी भी मिल जाता तो तुम्हे इतनी दूर तो लाश नही ढोना पड़ता ।

कम से कम सेकुलर तो मिलना ही चाहिये था तुम्हे. वो तो बिना भेदभाव के तुम्हारी मदद करते।

लेकिन अफसोस, कोई नही मिला तुम्हे जो मिले भी तो तुम्हारी ब्रेकिंग न्युज बनाकर “समाज को जगाने” के काम मे लगे रहे, या तमाशबीन बने रहे।

तुम्हे सोचना चाहिये कि हमारे यहाँ मदद भी घटना का स्तर देख कर दिया जाता है। मोटरसाईकिल की जलती लाईट को देखकर भुकभुक हाथ हिला कर मदद देने की बात हो तो दर्जनो मिल जाते, लेकिन गलती से अगर एक्सीडेंट कर गये तो वही पडे पड़े मर जाने के लिये छोड़ देते है।

उन्हे कोई फेसबुकिया नही मिलता गलती से अगर एक-आध मिल भी गया तो “सेल्फी” लेकर पोस्ट करता है। और अपनी गहरी संवेदना दर्शाते हुये लिखता है “Feeeling hurted ”

ये अलग बात है कि अपने ही शहर के अस्पताल रोजाना कोई ना कोई मांझी मिल जायेगा लेकिन उसकी सुध लेने की बजाय फोटो डालकर लाईक और कमेंट की भूख तक ही संवेदनशील है हम। Continue reading →

​क्या सच में केजरीवाल जी के पास चुनाव लड़ने को पैसे नहीं है?

 

क्या सच में केजरीवाल जी के पास चुनाव लड़ने को पैसे नहीं है?

🌎लेखक अजीत भारती जी की कलम से...कुछ दिन पहले आम आदमी पार्टी के महामहिम दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक बयान दिया था जो कि पार्टी के हर कार्यकर्ता को कचोटता होगा: आम आदमी पार्टी के पास गोवा चुनाव लड़ने के पैसे नहीं हैं, यक़ीन ना हो तो बैंक बैंलेंस देख लें।

हर पार्टी का कार्यकर्ता चाहता है कि उसकी पार्टी हर चुनाव में न सिर्फ भाग ले बल्कि उसे जीते भी। केजरीवाल जी की पार्टी ने तो ख़ैर 67-3 से दिल्ली को जीता और उनके पार्टी कार्यकर्ता भी चाहेंगे कि आने वाले चुनावों में, चाहे वो पंजाब है या गोवा, आम आदमी पार्टी की सरकार बने और बहुत बड़े बहुमत से बने।

मुझे याद है जब अन्ना का आंदोलन हुआ था और अन्ना सड़क से क़ानून बनाने के लिए अड़ गए थे तो मुझे लगा था कि ये आंदोलन ऐसे ही चला जाएगा। क्योंकि संवैधानिक रूप से वो संभव नहीं है। आपको क़ानून बदलना है तो राजनीति में आइए, वहाँ चुनाव लड़िए और सिस्टम बदलिए। मुझे ख़ुशी हुई थी जब केजरीवाल ने पार्टी बनाने की बात की थी और चुनाव लड़ा था।

लेकिन फिर जिस तरह की अनाड़ियों वाली बातें, दूसरी पार्टियों को हर समस्या के लिए ज़िम्मेदार बताना शुरू किया, मेरा मन उचट गया। मुझे ये लगने लगा कि ये व्यक्ति सिर्फ राजनीति में पावर के लिए आया है, ये बात तो नई राजनीति की करता है लेकिन इसके पैंतरे सब पुराने है। कुछ आम आदमी पार्टी के सदस्यों से बात भी की। किसी ने कहा कि काँग्रेस-भाजपा से लड़ने के लिए नीचे गिरना ज़रूरी है। एक ने कहा कि हम पार्टी की लाइन से परे चाहकर भी बात नहीं कर सकते।

बाद में पार्टी ने अपने ही दो महत्वपूर्ण लोगों को केजरीवाल के ख़िलाफ़ बोलने के लिए पार्टी से निकाल दिया। कई बड़े नेताओं ने सदस्यता छोड़ दी। लेकिन केजरीवाल का रवैया नहीं बदला। हाँ उनमें 2014 के बाद से एक नया बदलाव आया। वो ये कि ‘कीप काम एण्ड अब्यूज मोदी’। मतलब, हर समस्या के लिए मोदी को ज़िम्मेदार बता दीजिए।

आपलोगों ने तो पढ़ा ही होगा उनके हर ट्वीट की भाषा को लेकिन मैं लेटेस्ट बता देता हूँ। विधानसभा में मनीष सिसोदिया ने ‘चाइनीज़ माँझे’ को लेकर ये कह दिया कि मोदी और ‘इम्पोर्टेड’ चाइनीज़ माँझा माफ़िया की साँठ-गाँठ है और इसीलिए लोग मर रहे हैं इन माँझों से कटकर। आपको ये बताता चलूँ कि गुजरात में मोदी ने ही 2010 से ये माँझा प्रतिबंधित कर दिया था। और दूसरी बात चाइनीज़ माँझा चीन से आयात नहीं किया जाता। वो यहीं बनता है और चूँकि सस्ता होता है, उसे चाइनीज़ कहते हैं।

एक बात तो तय है कि केजरीवाल बहुत ही महत्वाकांक्षी व्यक्ति हैं। उन्हें उनके ख़िलाफ़ उठने वाली आवाज़ें पसंद नहीं और इसीलिए वो हर वैसे नेता को निकाल देते हैं जो उनकी आँख में आँख डालकर बात कर सके। योगेन्द्र यादव, प्रशांत भूषण आदि सबसे बड़े उदाहरण हैं।

इनकी महत्वाकांक्षा ही है कि पहले दिल्ली सँभल नहीं रही और ये पंजाब और गोवा को सुधारने निकल गए हैं। दिल्ली की हर समस्या का जवाब नजीब जंग के पास नहीं है। कई डिपार्टमेंट जैसे कि बिजली और पानी दिल्ली सरकार के पास है, जिसकी हालत दिल्ली में बहुत बुरी है। बारिश में पानी का जमना भी दिल्ली जल बोर्ड के हिस्से आता है, लेकिन वो ज़िम्मेदार मोदी को ठहराते हैं।

इनकी महत्वाकांक्षा के नाम पर 2014 तक तो इन्हें थप्पड़ पड़ने पर, इंक फेंके जाने पर, अंडे मारने पर आम आदमी के फ़ंड में दान के पैसे बढ़ जाते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं होता। ऐसा इसीलिए भी नहीं होता क्योंकि बड़े बड़े दानदाताओं का मोहभंग हो चुका है केजरीवाल जी के तरीक़ों से। उनकी ‘नई राजनीति’ जिसमें वो हर दिन अपनी छवि सुधारने के लिए 16 लाख रूपये का ख़र्च करते हैं, जिनके विज्ञापण का बजट 526 करोड़ है और वो विज्ञापण दिल्ली की बातें कर्नाटक-हैदराबाद-तमिलनाडु तक करते रहते हैं, लोगों ने पहचान लिया है।

टिकटों को लिए हर पार्टी पैसे लेती है, ये जगज़ाहिर है लेकिन ‘नई राजनीति’ वाले केजरीवाल जी जब पंजाब में टिकट देने के लिए पचास लाख से ढाई करोड़ माँगते हैं तो बुरा लगता है। ख़बरें आती है तो बहुत लोगों का मन टूटता है कि भ्रष्टाचार हटाने की बात करने वाला आखिर ऐसे क्यों कर रहा है। बुरा लगता है जब स्टिंग में पंजाब के आम आदमी पार्टी संयोजक महोदय पैसे की बात करते पकड़े जाते हैं।

और इन सबके बीच केजरीवाल जी का ये बयान कि उनकी पार्टी के पास चुनाव लड़ने को पैसा नहीं है, बड़ा ही क्यूट लगता है। केजरीवाल जी ‘नई राजनीति’ कर रहे हों या नहीं, लेकिन ‘राजनीति’ में तो प्रवीण होते जा रहे हैं। देख

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निर्भया” नहीं तो “द्रोपदी” ही मानिये “स्पेस” तलाशती स्त्री के लिए खींच दी “लक्ष्मण रेखा”

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👉 चम्पारण-न्यूज  “अतिथि सम्पादक” कुणाल प्रताप सिंह की कलम से…. रामगढ़वा जुमाई टोला की घटना में मै भी यह मानता हूँ कि पहले चाहे जब भी हुआ हो, लेकिन 15 जून को गैंग रेप नहीं हुआ.

हमारा समाज इतना संवेदनहीन नहीं हो सकता कि पांच-पांच लोग गैंग रेप करते रहे और वह तमाशबीन की भूमिका में रहे.

लेकिन यह भी मनना होगा की उस महिला के साथ उस दिन प्रताड़ना की जो पराकाष्ठ हुई क्या वह रेप की पीड़ा से कमतर है? उसके प्राइवेट पार्ट के बगल में तीन स्टिच क्या इस बात के गवाह आप नहीं है कि उसके साथ जो कुछ भी हुआ वह मानवता को शर्मसार करनेवाली घटना है.

मै यह भी मानता हूँ कि इलेक्ट्रोनिक मिडिया ने इस कांड में प्रतीक चुनने में भारी भूल की. इनलोगों ने नारी प्रताड़ना की हालिया प्रतिक बन चुकी ‘निर्भया’ को उस कांड से जोड़कर देखने कि कोशिश की.

लेकिन आप सब बताएं उस समय उस महिला कि स्थिति भी भरी सभा में द्रौपदी की नहीं रही होगी. सरेआम दिन में उसे जिस तरह पुरे गाँव में घुमा-घुमा के पिटा गया, कपडे फाडे और जुल्म ढाए गए. वह महाभारत काल की याद ताज़ा नहीं कर गया?

द्रौपदी को तो फिर भी उसके पतियों ने दांव पर लगाये थे.इसका पति या घरवाले ऐसी कोई शर्त आरोपियों के साथ नहीं हारे थे.

आरोपियों को तो गुस्सा इसलिए आया होगा कि यदि उसके बेटे या भाई ने उसे थोडा “भोग” ही लिया तो कौन सा पहाड़ टूट गया जो उसके मर्दानगी पर हमला बोल दिया ?

उन “मासूमो” को यह बात नागवार गुजरी कि वे नहीं तो दूसरा, दूसरा नहीं तो तीसरा कोई-न-कोई अवश्य “भोगता”.

ऐसे में एक साथ चार-चार औरतों के “मासूम पति” को नपुंसक बनाने का पाप करनेवाली इस औरत को उसकी किये की सजा तो मिलनी ही थी.

पुरुष वर्चस्वादी समाज ने इसकी सजा मुकर्रर की और सरेआम औरत को ऐसी सजा दी गयी कि शेष औरतों के लिए भविष्य की सबक हो कि पुरुषों के बरक्स खाड़ी होने की जुर्रत न करें.

यदि ऐसा नहीं होता तो क्या यह संभव था कि पांच लोग मिलकर एक औरत पर जुल्म ढाए और सारा गाँव मूक दर्शक बना रहे.

उस लड़की ने तो समीउल्लाह नमक वहशी के लिंग पर अकेले में वार किया था, लेकिन जब उसके जननागों पर भरे समाज के सामने प्रहार होते होंगे तो उसे अपनी महिला होने पर घिन नहीं आती होगी? ऐसे में मिडिया ने इस घटना को किस नजरिये से देखा?

थाना की ताल पर थिरकनेवालों ने कैसे इस केस को मैनेज किया? पुलिस को इस बात की गारंटी दी रिश्वत देने-दिलाने में ही नहीं मामला को दबाने में आपका साथ देंगे.

इन्ही दलालों के आश्वाशन पर पुलिस ने महिला को ईलाज के लिये सदर अस्पताल नहीं भेजा. आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की. आखिर मामला तूल पकड़ते कैसे सभी आरोपियों की गिरफ्तारी हो गयी?

देश की कई फेमिनिस्ट मेरी मित्र है. सबसे चर्चाएँ भी होती है. लेकिन किसी एक ने भी ऐसे किसी उदाहरण की पुष्टि नहीं की जिसमे प्रेम में विफल प्रेमिका ने प्रेमी का लिंग काट लिया हो.

हाँ मेरी स्मरण में 1994-95 का ऐसा एक उदाहरण जरुर है, जिसमे एक लड़की  ने दुष्कर्म का प्रयास करते राजद के एक विधायक का लिंग काट लिया था. ये महानुभाव योगेन्द्र नारायण सरदार छातापुर से राजद के विधायक थे.

पार्टी से उन्हें निकल दिया गया. बिधानसभा की सदस्यता समाप्त करवाई गयी और लड़की को कांस्टेबल की नौकरी दी गयी थी.

यह उदाहरण देने के पीछे मेरा आशय यह है कि हमें उन परिस्थितियों की पड़ताल करनी होगी, जिसमे कोई लड़की इतनी साहसिक कदम उठाने को बाध्य होती है. उसे पता होता है कि यह पुरुषवर्चस्ववादी समाज अपने नजरिये से चीजों की व्याख्या करेगा और कटघरे में औरत को ही खड़ा किया जायेगा. उसकी जान भी जा सकती है.

बावजूद इसके ऐसा किया तो इसका अर्थ साफ़ है कि वह लड़की अपनी जिंदगी कि कीमत पर भी दुष्कर्मी को उसके किये की सजा देनी चाहती थी. कुल मिलाकर  यदि देखा जायेगा तो मुझे लगता है कि घटना के तुरंत बाद मिडिया, पुलिस व आरोपियों की गठजोड़ नहीं बनी होती तो शायद यह मामला आज इतना तूल ही नहीं पकडता.

अब एकबार नहीं सैकड़ो बार मेडिकल कराकर, उसे बालिग या नाबालिग साबित कर कुछ हासिल होनेवाला नहीं. समाज में अपने स्वतंत्र वजूद के लिए संघर्ष करती एक स्त्री की पीड़ा, बेचैनी या छटपटाहट इससे कमेगी नहीं. बल्कि पुरुष वर्चस्वाद ने अपने लिए ‘स्पेस’ तलाशती स्त्री के लिए एक ‘लक्ष्मण रेखा’ खीच दी है.

इस पुरे प्रकरण में जो तोषप्रद बात है, वह यह है कि इस स्त्री का पति संकट के इस क्षण में पुरे साहस के साथ उसके साथ खड़ा है. वह उसे अपने साथ ले जाने को तैयार है. यह वाइक साहसिक है.

आ गए हैं अच्छे दिन #TransformingIndia हैश टैग के साथ अब बुराई करने वालों की कसिये ज़ुबान.

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अच्छे दिन : जन जन तक पहुंचाइये मोदी सरकार के 2 साल के कार्य

चम्पारण-न्यूज  “अतिथि सम्पादक” असलम शेख की कलम से….

1. जम्मू कटरा प्रोजेक्ट पिछले 10 सालो से बंद था उसे 1 साल में पूरा किया और आप जम्मू से मात वैष्णव देवी 20 रु में जा सकते हो. वर्ना टैक्सी वाले 2500 रु लेते है.

2. आज तक भारत अरुणाचल में हाईवे नहीं बना सका, पर मोदी सरकार ने 1 साल में रोड बनाके पूर्ण किया (China के काफी विरोध के बाद भी).. और अरुणाचल प्रदेश को पूर्ण रूपसे भारत को जोड़ दिया.

3. आज भारत की अपनी navigation सिस्टम (IRNSS) है. ये मोदी की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि है.. क्योंकि कारगिल वॉर में अमेरिका ने भारत को GPS डाटा नहीं दिया था. आज भारत का अपना GPS लॉन्च हुआ है जिसका नाम है IRNSS

4. अब तक 10,00,00,000 LED बल्ब वितरित किये गए, 21% बिजली बचत हो गयी है.

5. अब तक 7500+ गांव में बिजली पहुंचाई गयी.

6. इलेक्ट्रिसिटी निर्माण में 38% की बढ़ोतरी हुई

7. रेलवे ट्रैक बनाने का काम कांग्रेस में 0.6 km/day होता था. मोदी सरकार का 3.4 km/day है.

8.  रोड कंस्ट्रक्शन कांग्रेस में 3.7 km/day थी. मोदी सरकार 10.3 km/day है. सिर्फ 2 साल में 7063 km रोड बन चुकी है.

9. संजय गांधी निराधार योजना में केंद्र सरकार निराधार लोगो को 100 रु महीना देती थी जो आज 600 रु महीना हो गया. 2014 तक वो पैसा केंद्र से राज्य सरकार को आता था और राज्य सरकार 3 महीने का गैप रखके वो पोस्ट के द्वारा निराधार व्यक्ति तक पहुँचाता था. (3 महीने वो पैसा हजारो करोड़ कैसे और कहाँ उपुओग होता था नहीं पता)
मोदीजी ने 24 करोड़ बैंक अकाउंट खोले (गिनिस बुक वर्ल्ड रिकार्ड) और गरीब का पैसा सीधा बैंक अकाउंट में…. 0 भ्रष्टाचार!

10. मुस्लिम बुनकर बनारस, कोलकाता, लखनऊ से एक यूनियन बनाई गई उनके माल का एक ब्रांड बनाया गया और वह ब्रांड अभी अमेरिका या यूरोपियन देशो में काफी महंगे भाव में बिकता है. फायदा बुनकरों को हुआ और देश को भी.

11. कैलाश मानसरोवर का रास्ता 1962 से बंद था. मोदीजी की डिप्लोमेसी से China ने वह रास्ता खोल दिया, अब यात्रा 24 घंटे में होती है पहले 93 घंटे लगते थे.

12. कोयला घोटाला कांग्रेस ने 230 कोयला खदाने 1,80,000 करोड़ में बेचीं थी. सारे कॉन्ट्रैक्ट सुप्रीम कोर्ट ने cancel किये… मोदी सरकार ने सिर्फ 24 खदाने 2,20,000 करोड़ में बेचीं…!

13. ये ऐसा पहला PM है जिसने पूरे देश के अंदर एक भावना जागृत की, कि महिलाएं हमारी इज़्ज़त है और हम उन्हें खुले में शौच के लिए भेजते हैं. जिसे बीमारियां भी फैलती है. सिर्फ 2 साल में 7,00,00,000 टॉयलेट्स बन चुके है पूरे देश में .

14. मोदीजी ने स्कूल में बच्चियों के लिए टॉयलेट कम्पलसरी किये.

15. ये ऐसा पहला प्रधान मंत्री है जो जी तोड़ कोशिश कर रहा है कि भारत को UN में स्थाई सदस्यता मिले.

16. अब तक इस सरकार पर कोई भ्रष्टाचार का दाग नहीं लगा.

17. congress के 65 सालो तक हमें भगतसिंह, राजगुरु सुखदेव “आतंकवादी” करके पढ़ाया गया. पहली बार इतिहास सच्चा लिखकर इन्हे “शहीद” बताया.

18. महात्मा गांधी के बाद कोई पहला व्यक्ति आया जिसने बोला कि स्वच्छ भारत होना चहिये. स्वछता अभियान की शुरूआत की.

19. आज तक ट्रांसपोर्ट देश के अंतर्गत मामले में रोड से या ट्रैन से या एयर से होता था पहली बार पब्लिक ट्रांसपोर्ट और गुड्स ट्रांसपोर्ट पानी के द्वारा हो रहा है. जिसमे टाइम पैसा और अंतर कम हो गया है.

20. आज तक सिलेंडर की सब्सिडी अम्बानी को और हमको समान थी, पहला PM जिसने बोला कि आपको सब्सिडी की जरूरत नहीं है तो उसे वापस करिये. लोगो में एक चेतना जगी और देखते देखते 1,32,00,000 लोगो ने सब्सिडी छोड़ दी.

21. इंडिया पाक बॉर्डर पर Laser Wall बैठाए गए.

22. स्वच्छ गंगा :- केमिकल इंडस्ट्रीज का पोलुटेड पानी अब गंगा में नहीं समाता है. जिससे 9 करोड़ लोगो को पीने का और खेती के लिए पानी उपलब्ध हो गया.

23. दलितों के ऊपर होनेवाले अत्याचारों का फैसला 60 दिनो के अंदर हो ऐसा पहली बार कानून बना.

24. भारत बांग्लादेश सीमा समझौता.

25. इंडिया पहले पेट्रोल इंटरनेशनल मार्किट से खरीदता था जिसमे दलाली देनी पड़ती थी.., अब इंडिया 35 % से ज्यादा सऊदी से डायरेक्ट खरीदता है. और 19 देशों के साथ क्रूड आयल इम्पोर्ट का इंडिया का कॉन्ट्रैक्ट सुषमा स्वराज ने किया है.

26. 6 IIT और 3 IIM 2 साल में शुरू हो जायेंगे बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन काम शुरू है.

27. मेक इन इंडिया के माध्यम से अब तक भारत में 9,00,000 करोड़ का इन्वेस्टमेंट आ चुका है. जिसमे UAE का 4,00,000 करोड़ का है.

28. कांग्रेस सरकार में BSNL 10 साल में 8000 करोड़ Loss में था. मोदी सरकार में BSNL 2 साल में 672 करोड़ “प्रॉफिट” में है.

29. Congress एविएशन मंत्रालय 600 करोड़ प्रति माह Loss में था.., अभी नो लोस्स नो प्रॉफिट में है

30. देश की 17 रेलवे स्टेशन्स Wi Fi फ्री हुए है.

31. पहली बुलेट ट्रैन ट्रैक बनने का काम शुरू

32. वाराणसी 80 घाट एकदम स्वच्छ हो गया है.

33. जम्मू से कश्मीर अब सिर्फ 2 घंटे में सफर तय होगा हिमालय को सुरंग बनके ट्रैन हिमालय के नीचे से जाएगी. सुरंग बनने का काम IRB कर रही है.

34. गरीब का और किसानो का बीमा 2 लाख तक सिर्फ 20 रु में !

35. 3.5 करोड़ LPG बोगस कस्टमर को ढूंढ के निकाल गया और उनके कनेक्शन्स कैंसल किये गए.

36. 6 करोड़ लीटर पानी पहुंचाया गया सुरेश प्रभु द्वारा महाराष्ट्र में !
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37. स्किल इंडिया में 50000 तक लोन बिना किसी गारंटी के. 37,00,000 लोगो को अब तक लाभ मिल चुका है.

38. प्रोविडेण्ट फण्ड का अकाउंट परमानेंट कर दिया. अब आप कितनी भी कंपनी बदलो आपका PF अकाउंट एक ही रहेगा, बदलेगा नहीं.

39. डिजिटल इंडिया के तहत स्कूल में डिजिटल क्लास रूम का निर्माण.. अब तक 81,00,000 क्लास रूम डिजिटल हो चुकी है

40. सरकार किसानो को यूरिया सब्सिडी देती थी, लेकिन वह यूरिया किसानो तक पहुंचने के बजाय केमिकल फैक्ट्रीज में जाता था.. मोदीजी ने उस का नीम कोटिंग करके उसे किसी काम का नहीं रखा वह सिर्फ खाद ही उपयोग हो सकता है. भ्रस्टाचार की सम्भावनाएं ख़त्म कर दी. भ्रष्टाचार का सालाना 10,000 करोड रु बच गया..!

41. सालो से अटका OROP को लागू किया गया..!!

42. 50000 करोड़ का कालाधन पकड़ा गया..!!

आ गए हैं अच्छे दिन… #TransformingIndia हैश टैग के साथ अब बुराई करने वालों की कसिये ज़ुबान.

असलम शेख
“अतिथि सम्पादक” चम्पारण न्यूज
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क्या कांग्रेस मुक्त भारत का सपना होगा साकार?

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सम्पादक की कलम से….
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क्या कांग्रेस मुक्त भारत का सपना होगा साकार? अरुणाचल, उत्तराखंड, मिज़ोरम के बाद अब मेघालय में  बगावत के सुर।
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लोकसभा चुनाव 2014 और 5 राज्यों के हालिया विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के दयनीय प्रदर्शन से केन्द्रीय नेतृत्व की पार्टी पर पकड़ बेहद कमजोर हो गई है.

कांग्रेस में अपने भविष्य को अनिश्चित पाकर उसके राज्य स्तरीय नेता सुरक्षित ठौर-ठिकाना पाने की कोशिशों में जुटे हैं और इसी का परिणाम है अलग-अलग राज्यों में एक के बाद एक होने वाले विद्रोह.

अरुणाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बाद दो महीने पहले मिजोरम में कांग्रेस सरकार के सभी मंत्रियों ने इस्तीफे की धमकी दी थी जिसके बाद मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह ने आत्मसमर्पण करते हुए मंत्रिमंडल में फेरबदल स्थगित कर विद्रोह को दबाया था.

अब ताज़ा मामला मेघालय का है जहां कांग्रेस को बगावत झेलनीं पड़ रही है. अपने तानाशाही रवैए की वजह से पार्टी नेताओं की नजरों में खटक रहे मुख्यमंत्री मुकुल संगमा ने कांग्रेस आलाकमान को चिट्ठी लिखी है.

संगमा ने यह चिट्ठी बीते सप्ताह हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शिलॉन्ग दौरे के बाद लिखी है.

कांग्रेस के कुछ विधायक और मंत्री मुख्‍यमंत्री मुकुल संगमा को हटाने की मांग कर रहे हैं. हाल ही में तुरा लोकसभा उपचुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद मामला और गंभीर हो गया है.

उपचुनाव में मुकुल संगमा की पत्‍नी दिकांची डी शिरा कांग्रेस उम्‍मीदवार के रूप में मैदान में उतरी थीं.

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी को लिखी चिट्ठी में मुख्यमंत्री मुकुल संगमा ने कहा कि पार्टी के कई नेता भाजपा के संपर्क में हैं.

उन्होंने कहा कि पार्टी के कुछ नेताओं ने भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव और असम के शिक्षा मंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा से मुलाकात की है.

शर्मा को उत्तर-पूर्व में भाजपा का अहम रणनीतिकार माना जाता है. कुछ समय पहले ही कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए शर्मा ने असम में पहली बार भाजपा की सरकार बनवाने में अहम्  भूमिका निभाई है.

वहीं, भाजपा नेता राम माधव ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि मेघालय में यह कहना सरासर गलत है कि भाजपा सरकार गिराने की कोशिश कर रही है. कांग्रेस पार्टी को दूसरों पर आरोप लगाने की बजाय अपने घर को सुधारने की जरूरत है.

“सम्पादक”
राजेश कुमार सिंह
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क्या अपने तय दीर्घकालिक राजनैतिक रास्ते पर है भाजपा?

सम्पादक की कलम से……

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भाजपा ने असम नहीं, पूर्वोत्तर की सातों बहनों के प्रति स्नेह और बंधन का रिश्ता खोला है. असम, पूर्वोत्तर के उस गेट की तरह है जिसके घेरे के राज्यों के तमाम मरहले ऐसे हैं जिन्हें लंबे संदर्भों में देखा जाना है.

ठीक वैसे ही, जैसे इसे असम में सकारात्मक ढंग से जमीन पर किया गया. असम में भाजपा की जीत इस पूरे क्षेत्र के लिए एक बड़ी सकारात्मक और दीर्घकालिक ऐतिहासिक परिवर्तन की शुरुआत है, जिसका दायरा विकास से लगायत संस्कृति तक होना है.

बंगाल में ममता दीदी को मिली वोटर की मुहब्बत उसके वामपंथी दलों से नफरत की वजह से है. लेफ्ट के कांग्रेस के साथ आने ने वोटर के मन में वामपंथी सत्ता की दहशत की याद को ताजा कर दिया और इसे किसी कीमत पर रोकने के लिए उसने वोट तृणमूल को दे दिया.

बंगाल के मतदाता में लेफ्ट के प्रति इस नफरत में थोड़ी भी कमी होती तो भाजपा के और भी बढ़े वोट प्रतिशत के साथ सीटों में भी अच्छी संख्या देखने को मिलती.

केरल में चांडी के जाने की बुनियाद पर लेफ्ट गठबंधन का आना और इसके बीच भाजपा को राज्य में मिले वोट शेयर, राज्य की राजनीति में दीर्घकालिक परिवर्तन की आहट है.

केरल की राजनीति में चांडी के सत्ता के रहते, भाजपा और संघ खास तौर पर एक सुविधाजनक दायरे में रहते रहे हैं. लेकिन इस चुनाव में जाते हुये और राज्य की राजनीति में, भाजपा ने राज्य की जमीन में वामपंथी अराजक और हिंसात्मक राजनीति के खिलाफ अपनी मजबूती जारी रखी.

यह संकेत है कि  लेफ्ट को अब अपनी अकेली बची जमीन पर भी भाजपा से ही लड़ना होगा. केरल के पहले निर्वाचित भाजपा विधायक श्री ओ. राजगोपाल उस टक्कर के पहले मजबूत सांकेतिक प्रहार हैं.

बड़ी संख्या में सांसद रखने वाली जयललिता का कांग्रेस समर्थित करूणानिधि पर जीत हासिल करना एक महत्वपूर्ण बदलाव केन्द्रीय संसदीय राजनीति में लाने वाला होगा जिसमे वर्तमान केंद्र सरकार और भाजपा लाभ की स्थिति में होगी.

ममता के बंगाल के साथ तमिलनाडु का यह गैर कांग्रेसी और कांग्रेस विरोधी राजनीति का मौजूदा राजनैतिक रिश्ता और माहौल, केंद्र को सदन, खास तौर पर राज्यसभा में कैसी स्थिति में ला सकता है यह समझने में मुश्किल नही होनी चाहिए.

पुडुचेरी के जनमत का सम्मान करते हुए. यह कहा जा सकता है कि भाजपा अपने तय दीर्घकालिक राजनैतिक रास्ते पर है.

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