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श्राद्धकर्म पर भारी, नोटों की मारामारी

14_11_2016-bank

रुपयों की लिए चल रही मारा-मारी के बीच गया में एक व्यक्ति के मर जाने पर उसके श्राद्धकर्म के लिए रुपये की किल्लत होने की वजह से अड़चन आई जिससे परिजन परेशान रहे।

गया [CN]: कहते हैं कि जीवन के दो सत्य हैं जन्म और मृत्यु। न किसी के जन्म को रोका जा सकता है और न ही मृत्यु को टाला जा सकता है। जन्म से मृत्यु के बीच होने वाले संस्कारों की तारीखों में भले हम बदलाव कर लें, लेकिन आखिरी सत्य यानी मौत के बाद होने वाले कर्मकाण्डों की तारीख नहीं बदलती।
विडंबना यह है कि अतरी प्रखंड के जीरी पंचायत के उपमुखिया बनमागोसाई मठ निवासी रामकिशुन मांझी के श्राद्धकर्म को टालना पड़ा। कारण, 500-1000 की नोटबंदी है।
उपमुखिया की पत्नी प्यारी देवी व भाई सुरेन्द्र मांझी ने बताया कि राम किशुन मांझी की मौत 29 अक्टूबर को सांप काटने से हो गई थी। दशकर्म 8 नवंबर को था। इसके दो दिन बाद 10 नवंबर को हिन्दू रीति-रिवाज के अनुसार ब्रह्मभोज था।

500 और 1000 रुपये के नोट बंदी की घोषणा के बाद जब परिजन श्राद्धकर्म के लिए सामान लेने बाजार गए तो दुकानदारों ने बड़े नोट लेने से इन्कार कर दिया। इसके बाद 10 नवंबर को पंजाब नेशनल बैंक की उपथु शाखा में गए। वहां सिर्फ 4000 रुपये के नोट ही बदले गए। इतने कम पैसे में ब्रह्मभोज का श्राद्ध नहीं हो सकता था। आखिरकार, श्राद्ध कर्म को रोक देना पड़ा।

उपमुखिया की पत्नी प्यारी देवी कहती हैं कि जब घर में रुपये होंगे, तभी पति का श्राद्धकर्म किया जाएगा। उनका खाता पीएनबी की शाखा में है, लेकिन बैंक में अधिक भीड़ के कारण और रुपये नहीं जमा कर सकीं।

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