​*भागलपुर में जलसंकट,सिमटती जा रही है गंगा*

​*भागलपुर में जलसंकट,सिमटती जा रही है गंगा*
*-कुन्दन घोषईवाला”दैनिक खोज खबर के लिए”भागलपुर यात्रा से लौटकर*

शहर से दूर होती जा रही गंगा, गंगा में भर रहे बालू तथा भागलपुर का दिन-प्रतिदिन गिरता जल स्तर निकट भविष्य में परेशानियों का सबब बन सकता है।वर्तमान परिस्थितियों का आलम यह है कि सिल्क सिटी में पेयजल का संकट गहराता जा रहा है। वाटर वर्क्स में पर्याप्त पानी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। समय रहते यदि वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो भागलपुर के शहरी इलाकों में पानी के लिये हाहाकार मचना तय है।

*वैकल्पिक व्यवस्था के लिये अधूरा पहल*

शहर में जलसंकट से निजात के लिये पैन इंडिया की नींद तो अब जा कर खुली है। लेकिन, वो भी स्थायी नहीं बल्कि अस्थायी निदान पर कार्य किया जा रहा है। वैकल्पिक व्यवस्था के तहत पैन इंडिया ने रविवार से ही बरारी वाटर वर्क्स में नदी से गाद हटाने के लिये मजदूरों को लगाया गया है, जो नाकाफी साबित हो रहे हैं। योजना है कि इंटेल वेल से नदी के बीच कैनाल से दो फीट तक गाद को हटा कर गहरा किया जायेगा। पैन इंडिया के परियोजना निदेशक शशि मोहन सिंह ने बताया कि सोमवार से ही मजदूरों की संख्या को बढ़ा कर 21 कर दिया गया है।15 मजदूरों को नदी से तथा 6 मजदूरों को इंटेल वेल से गाद निकालने में लगाया गया है। उन्होंने बताया कि इंटेल वेल की गहराई ढाई फीट तक बढ़ाई जायेगी ताकि पानी का इंटेल वेल में ज्यादा से ज्यादा भंडारण किया जा सके। वहीं पैन इंडिया के पीडी ने बताया कि गाद को जेसीबी से हटाने के लिये भी योजना तैयार कर लिया गया है।

*ऊंट के मुँह में जीरा*
सिल्क सिटी से स्मार्ट सिटी बन रहे भागलपुर में अपने आशियाने को तलाशने और स्थाई रूप से बसने की मंशा लिये भागलपुर जिले के ग्रामीण इलाकों समेत, सीमावर्ती मधेपुरा, सहरसा, पूर्णियां, कटिहार, खगड़िया, बांका, मुंगेर आदि के लोगों की नजरों में खास आकर्षण की वजह से दिन-प्रतिदिन यहाँ जनसंख्या का दबाव बढ़ता जा रहा है।लिहाजा, शहरों में नित नये गगनचुंबी इमारतों का निर्माण, औद्योगीकरण, जनसंख्या वृद्धि आदि से यहाँ जल का व्यापक स्तर पर ह्रास होना लाजिमी हो गया है। वहीं गंगा का दिन-प्रतिदिन सिमटना, घटते जलस्तर ने जलसंकट के दुष्परिणामों से लोगों को रूबरू कराना अब शुरू कर दिया है। बता दें कि वर्तमान में बरारी वाटर वर्क्स की क्षमता मात्र नौ एम एल डी की है। जबकि शहर की वर्तमान साढ़े चार लाख की आबादी को 19 नए और 4 पुराने जलमीनार के साथ 460 किलोमीटर पाइप में जलापूर्ति के लिये 45एम एल डी क्षमता वाले वाटर वर्क्स की जरूरत है। वहीं वर्ष 2047 तक सिर्फ शहर की आबादी दस लाख तक होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। लिहाजा उक्त जनसंख्या के अनुरूप अब 90 से 110एम एल डी वाटर वर्क्स क्षमता का डिज़ाइन तैयार किया गया है।

*पैन इंडिया को मिला है कार्य*

पैन इंडिया को बुडको ने जलापूर्ति योजना के लिये 260करोड़ रूपये का कार्य दिया है। जिसे वर्ष 2022तक पूर्ण करना है। उक्त राशि से पैन इंडिया को कुल 45000 घरों में कनेक्शन, बरारी व वारसलीगंज में दो जलमीनार, बरारी वाटर वर्क्स का जीर्णोद्धार, सीएससी भवन का निर्माण होना है। जो कुल तीन चरणों में पूरा किये जायेंगे।

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