प्रिय गुरमेहर, तुम्हारे दस महीने पुराने विडियो में कुछ भी गलत नहीं है

प्रिय गुरमेहर, तुम्हारे दस महीने पुराने विडियो में कुछ भी गलत नहीं है

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All muslims are Pakistanis: गुरमेहर कौर 

✍अजीत भारती की कलम से:- मैंने गुरमेहर कौर का विडियो आज देखा क्योंकि आज ये वाइरल हो गया है। इस विडियो में वो फोटो/प्लाकार्ड नहीं है जिसमें वो ‘नॉट अफ़्रेड ऑफ़ एबीवीपी’ वाला साइन लिए खड़ी हैं।

जो विडियो आज वाइरल हुआ है, वो दस महीने पुराना है। उसको पूरा देखने पर पता चलता है कि उसमें कोई गलत बात नहीं है। जिस एक स्क्रीनशॉट को निकाल कर उसपर मजाक बनाए गए, वो एकदम संदर्भहीन है।

इस विडियो में उन्होंने एक शहीद की बेटी होने और अपने पिता का अपनी ज़िंदगी में ना होने वाले एक बच्चे का नजरिया दिखाया है कि कैसे युद्ध से किसी को फायदा नहीं है। इसमें ना तो कुछ राष्ट्रद्रोही बात है, ना ही किसी को उकसाने वाली।

विडियो बॉब डिलन के एक गीत ‘सबटैरेनियन होमसिक ब्लूज़’ के स्टाइल पर आधारित है जिसमें बॉब काफ़ी शांत और भावहीन चेहरे के साथ सिर्फ लिखे हुए कार्ड्स के जरिए अपनी बात गाकर, और शब्दों को दिखाकर, चले जाते हैं।

गुरमेहर उसी तरह से शांत हैं और अपनी पीड़ा बताती हैं। ये उनकी अभिव्यक्ति है और इसमें कहीं भी, कुछ भी गलत नहीं है।

मैंने भी एक पोस्ट लिखा था। मेरा पोस्ट उस हिस्से को लेकर था जो उनके फेसबुक से वाइरल हुआ जिसमें वो ‘नॉट अफ़्रेड ऑफ़ एबीवीपी’ थामे एक पोस्ट के जरिए कैम्पस में ‘एबीवीपी की गुंडागिरी’ की भर्त्सना की थी। इस पोस्ट को मीडिया ने उनकी अपनी वैयक्तिक अभिव्यक्ति से कहीं ज्यादा उनके शहीद की बेटी होने से जोड़ कर ‘बेचा’।

मैंने अपने पोस्ट में उनसे आग्रह किया था कि मीडिया को बोलें कि ये बात उनकी अपनी है और उनके एक शहीद की बेटी होने या ना होने से इस बात का वजन ना तो घटता है, ना ही बढ़ता है। एक पोस्ट और लिखा मैंने जिसमें लोग उन्हें गालियाँ और बलात्कार की धमकियाँ देने वालों पर मेरी टिपप्णी थी।

मेरा ये कहना है कि हर व्यक्ति की अपनी स्वतंत्रता है, और हर बात का एक संदर्भ होता है। मैं गुरमेहर को उस विडियो में ‘पाकिस्तान ने मेरे पिता को नहीं मारा, युद्ध ने मारा’ के लिए कुछ नहीं कह सकता क्योंकि उसके आगे और पीछे के संदेश पढने के बाद आपको पता चल जाएगा कि उसमें कुछ भी गलत या बुरा नहीं है। मैं युद्ध का समर्थक नहीं हूँ, लेकिन जब वही एक रास्ता हो तो मैं अपनी सरकार और देश के साथ रहूँगा।

ख़ैर, अगर आपको गुरमेहर से भिड़ना ही है, या आलोचना ही करनी है तो आप ये पूछ सकते हैं कि किन सबूतों के आधार पर वो एबीवीपी को गुण्डा कहने लगीं? किन सबूतों के आधार पर उन्होने रेप की धमकी देने वालों को एबीवीपी/बीजेपी/आरएसएस का मान लिया? क्या विश्वविद्यालयों में सिर्फ एबीवीपी ने ही हिंसा की बातें की हैं, घटनाओं को अन्जाम दिया है?

ऐसा कई बार होता है कि हम घृणा करने के चक्कर में इस बात को स्वीकार नहीं पाते कि सामने वाले की हर बात गलत नहीं हो सकती। हमें लगता है चूँकि भाजपा ने अनुपम खेर को पद्म भूषण दिया है तो वो चाटूकारिता से ही मिली होगी। हमें लगता है कि केजरीवाल का हर काम घटिया है। हमें लगता है कि सारे मुस्लिम आतंकी हैं। हमें लगता है कि बिहार में बस लूटपाट ही होता है।

हमें लगता है कि गुरमेहर कौर की हर बात वामपंथी विचारधारा की है और चूँकि वो आम आदमी पार्टी के मुखिया के साथ फोटो में है तो उसकी हर बात गलत हो जाएगी।

हम इस बात पर चर्चा कर सकते हैं कि आखिर वो हिम्मती लड़की बीच से ही क्यों चली गई? आखिर किसने उसे मजबूर किया? जब वो एबीवीपी के गुण्डों को कार्ड पर लिखकर ये कह सकती है कि वो डरती नहीं, तो फिर वो इस कैम्पेन से बाहर क्यों चली गई? क्या उसे वामपंथियों आदि ने एक मोहरे की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश की और उसे इस बात का अहसास हो गया?

और चूँकि मैं लिखता हूँ, तो मेरी हर बात सही ही होगी, ऐसा नहीं है। मैं भी गलतियाँ करता हूँ, गलत बातें लिखता हूँ और इसी कारण से मेरी हर बात आँख मूँद कर मत मानिए। विवेक का इस्तेमाल कीजिए। इंटरनेट पर सर्च कीजिए, तथ्यों की जाँच कीजिए और फिर मेरी बात आगे बढ़ाईए।

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