​कोटा प्रकरण:सरकार का इकबाल खत्म, सत्ता अहम और घमण्ड के कारण घटना घटी – गहलोत

कोटा प्रकरण:सरकार का इकबाल खत्म, सत्ता अहम और घमण्ड के कारण घटना घटी – गहलोत

आज़ाद नेब ब्यूरो प्रमूख दैनिक खोज खबर जयपुर राजस्थान
जयपुर 26 फरवरी। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच कोटा में हुई घटना को लेकर कहा है कि कानून को हाथ में लेने का अधिकार किसी को नहीं है। सी.आई. के साथ किये गये दुर्व्यवहार को किसी भी रूप में उचित नहीं ठहराया जा सकता। यदि स्थानीय पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही थी तो उच्चाधिकारियों से शिकायत की जा सकती थी। सत्ता पक्ष में आप हैं तो गृह मंत्री एवं मुख्यमंत्री तक शिकायत कर सकते थे। 
गहलोत ने लखनऊ से जयपुर पहुंचने पर अपने निवास पर आये मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए कहा कि कोटा प्रकरण में किन्हीं दो जातियों का सवाल नहीं है। इस प्रकार के सवाल बनाये जाना भी दुर्भाग्यपूर्ण है। सामने तो यह आया है कि सत्ता पक्ष में बैठे लोगों को अहम् और घमण्ड के कारण यह सब कुछ हुआ। मामले में गलती को ढूंढना जांच का विषय हो सकता है, मगर जांच में दोषी पाये जाने पर दोषी को सजा दी जानी चाहिए।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि जानकारी के अनुसार एक तरफ पेट्रोल पम्प पर आग लगी थी, दूसरी तरफ सत्तापक्ष भाजपा के नेता और पुलिस में पत्थरबाजी और लाठीचार्ज हो रहा था। ये सभी लोग मिलकर यदि आग बुझाने में जिला प्रशासन का सहयोग करते तो आमजन में अच्छा संदेश जाता। 

गहलोत ने कहा कि जांच के लिए भाजपा प्रदेशाध्यक्ष को भेजे जाने का कोई तुक नहीं था। वहां तो किन्हीं दो वरिष्ठ नेताओं को भेजा जा सकता था। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष को तो सिर्फ आमजन में व्याप्त धारणा को ठीक करने और डैमेज कंट्रोल करने के लिए वहां भेजा गया था।

विधानसभा सत्र को लेकर  गहलोत ने कहा कि प्रतिपक्ष के नेता रामेश्वर डूडी से उनकी लम्बी चर्चाएं हुई हैं। विधायकदल सभी मुद्दों को उठायेगा और सरकार को घेरने का प्रयास करेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह किया है कि विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास नहीं करें। विपक्ष की संख्या कम हो सकती है। मगर उसकी आलोचना से भी सत्ता पक्ष और राज्य को लाभ मिलता है। आलोचना के कारण सरकारी मशीनरी सजग होती है और वह काम करती है। अब तक का अनुभव बताता है कि सत्ता पक्ष ने विपक्ष को दबाये रखना और उसे बोलने नहीं देने की नीति अपना रखी है। किसी भी बहाने मार्शल को बुला लेना और विपक्षी सदस्यों को धक्के देकर बाहर तक निकलवाया गया है। बुजुर्ग विधानसभा अध्यक्ष बार-बार गुस्सा करते हैं और मार्शल को बुलाते हैं। उससे मुख्यमंत्री खुश हो सकती हैं मगर उनके खुद के हित में नहीं है।

एक अन्य प्रश्न पर उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बड़ा दिल रखें और हमारी जो रिफाईनरी, डूंगरपुर-बांसवाड़ा-रतलाम रेल्वे लाईन, झालावाड़ की परबन सिंचाई परियोजना, जयपुर मेट्रो का दूसरा फेज, भीलवाड़ा की मेमो कोच फैक्ट्री, निःशुल्क दवा एवं जांच योजना, किसानों के लिए ड्रिप सिंचाई योजना, सोलर पम्प, डिग्गी निर्माण, स्प्रिंकल आदि में सब्सिडी और दूध बिक्री पर बोनस जैसी तमाम जनकल्याणकारी योजनाओं को जनहित में मजबूती प्रदान करने का प्रयास करे। 

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री ने पूर्वाग्रह और नकारात्मक सोच के साथ तीन साल में जो फैसले किये, किसी योजना को आगे नहीं बढ़ाओ और बंद कर दो, उसका परिणाम मुख्यमंत्री खुद के लिए भी ठीक नहीं रहा है और सरकार के लिए भी। अब चुनाव को देखते हुए डर के मारे कुछ कर सकती हैं, ऐसा मैं मानता हूं। 

कानून व्यवस्था के सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकार की नाक के नीचे राजधानी जयपुर में और पूरे प्रदेश में जो घटनाएं हो रही हैं वे दुर्भाग्यपूर्ण है। दुख इस बात का है कि तीन साल से हम लगातार आगाह कर रहे हैं मगर न तो गृहमंत्री और न ही मुख्यमंत्री के चेहरे पर चिंता की लकीरें हैं। हम विपक्ष में हैं, हमारी भावनाओं की इज्जत करते तो इनको ही लाभ मिलता। 

श्री गहलोत ने गुर्जर नेता कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला से सवाई मानसिंह अस्पताल में जाकर कुशलक्षेम पूछे जाने पर कहा कि चिकित्सकों ने उनकी जल्दी ही स्वस्थ होने की बात कही है। गुर्जर आंदोलन के संबंध में सवाल किये जाने पर उन्होंने कहा कि हमने पांच साल तक उनके साथ डायलॉग बनाये रखा था। उसके कारण कोई अप्रिय घटना सामने नहीं आई, लेकिन भाजपा शासन के दौरान 70 गुर्जर मारे गये और 21 बार गोलियां चली। इस सरकार के नुमाईंदों को भी कांग्रेस सरकार की तर्ज पर बात करनी चाहिए। 

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